Monday, October 8, 2012

सिगरेट का कश।

वो - इतनी सिग्रेट तो मत पियो करो।
मैं - क्यों ?
वो- धुएं में तुम्हारा चेहरा छुप जाता है।
मैं - हां हाँ, अंच्छा बाबा अब और नहीं। देख लो जितना देखना है
वो - फिर क्या मालूम,...
मैं - क्या? हाँ हाँ हाँ, कंही सिगरेट ही मिले न मिले? यंही कहना है न ?


No comments: